आगरा, अगस्त 12 -- नर्वदेश्वर महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के मिलन तथा सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचक भरत लाल शास्त्री महाराज ने सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनाते हुए सच्ची मित्रता, प्रेम, त्याग, संतोष और निष्काम भक्ति का महत्व बताया। श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग आते ही श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथावाचक ने बताया कि सुदामा अत्यंत निर्धन होने के बावजूद भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी भक्ति और प्रेम में कभी कमी नहीं आई। गुरुकुल में साथ शिक्षा प्राप्त करने वाले श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निःस्वार्थ थी। पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे। उनके पास भेंट के रूप में केवल कुछ मुट्ठी चावल के दाने थे, जिन्हें उन्होंने संकोच के साथ भ...