श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग से जीवन में प्रेम और समर्पण की सीख
कन्नौज, अप्रैल 18 -- महादेव मंदिर, मिरगावां में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को व्यास अमन पाठक ने प्रवचन के दौरान कहा कि सच्ची मित्रता शब्दों की नहीं, बल्कि हृदय के भावों की पहचान से बनती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि जीवन में वही संबंध टिकाऊ होता है, जिसमें स्वार्थ नहीं, बल्कि समर्पण और अपनापन हो। श्रीकृष्ण और सुदामा की कथा का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दोनों के बीच प्रेम अटूट रहा। व्यास ने बताया कि जब सुदामा कठिनाई में द्वारिका पहुंचे, तो भगवान श्रीकृष्ण ने उनका सम्मान कर यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा मित्र वही है, जो बिना कहे पीड़ा को समझ ले। यह भी पढ़ें- रुक्मिणी विवाह व सुदामा चरित सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, भागवत कथा का समापन कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। शिव सेवा समिति के अध्यक...
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