श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का प्रतीक: कृष्णप्रिया तुलसी
मुजफ्फर नगर, जून 15 -- मुजफ्फरनगर। श्री श्यामाश्याम मंदिर में आयोजित कथा में कृष्णप्रिया तुलसी जी ने कहा कि सच्ची मित्रता में प्रेम, समानता और मर्यादा का होना अनिवार्य है। उन्होंने श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता को निस्वार्थ प्रेम व अटूट विश्वास का सबसे बड़ा प्रतीक बताया। कथा व्यास ने सुदामा के द्वारिका गमन और श्रीकृष्ण द्वारा नंगे पैर दौड़कर मित्र को गले लगाने के भावपूर्ण प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया प्रभु ने मित्र की दो मुट्ठी चावल की भेंट स्वीकार कर उन्हें दो लोकों का वैभव सौंप दिया। सुदामा की गरीबी का कारण बचपन में मित्र के हिस्से के चने खाना था। उन्होंने सीख दी कि कभी किसी के हिस्से का धन नहीं रखना चाहिए, उसे किसी न किसी रूप में चुकाना ही पड़ता है। यह भी पढ़ें- श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का प्रतीक: कृष...
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