आगरा, दिसम्बर 10 -- कावेरी कौस्तुम्भ, भावना एस्टेट में चल रही कथा के समापन दिवस पर कथा स्थल भक्तिरस, भावनाओं और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा। जहां रुक्मणि हरण और दिव्य विवाह का अलौकिक वर्णन श्रवण कर श्रद्धालु आनंदित हुए, वहीं श्रीकृष्ण-सुदामा की अद्वितीय मित्रता लीला ने हर हृदय को भावुक कर दिया। कथा व्यास भागवत रत्न से अलंकृत मोहित स्वरूप आचार्य ने रुक्मणि हरण, श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह तथा श्रीकृष्ण-सुदामा की चिरकालीन मित्रता का अद्भुत वर्णन करते हुए भावपूर्ण शैली में बताया कि रुक्मणि जी परम भक्ति और समर्पण की प्रतिमूर्ति हैं। शिशुपाल से विवाह के प्रयासों के बीच रुक्मणि ने श्रीकृष्ण को पत्र लिखकर अपनी व्यथा और भक्ति व्यक्त की।कथा के सबसे भावनात्मक क्षण तब आए जब आचार्य ने श्रीकृष्ण-सुदामा की अद्वितीय मित्रता का वर्णन किया। उन्होंने क...