शाहजहांपुर, दिसम्बर 13 -- शाहजहांपुर। श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया। व्यासपीठ से आचार्य अंकुर शुक्ल ब्रजराजदास ने महारास के पांच अध्यायों का वर्णन करते हुए कहा कि ये अध्याय भागवत के पंच प्राण माने जाते हैं। कथा में भगवान का मथुरा गमन, कंसवध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण, कालयवन वध और ऊधव-गोपी संवाद का वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि ऊधव ने गोपियों को अपना गुरु माना। विवाह की आकर्षक झांकी ने वातावरण को भक्ति रंगों से भर दिया। भागवत आरती आचार्य श्रवण और विनीत शुक्ल ने कराई। यहां मनोज कुमार, सनी कुमार, सचिन कुमार, रीता, रूप, कमल, अंश, वंशिका, अग्रिम, अंजलि, मोना, प्रज्ञा, सुनीता, अनीता, विनीता और गुड्डी आदि रहीं।
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