वाराणसी, अगस्त 29 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। सावन पूर्णिमा पर काशी में ब्राह्मणों ने भगवती गंगा को साक्षी मानकर श्रावणी उपाकर्म के विधान किए। समूहों में गंगा में दस विध स्नान किया। जाने-अनजाने हुए पापों के शमन के लिए भगवान् भास्कर एवं माता गायत्री की उपासना कर तर्पण किया। अस्सी से राजघाट के मध्य प्रमुख घाटों के सुरक्षित स्थानों पर शुक्रवार को मंत्रोच्चार गूंजे। गंगा में खड़े होकर पंचगव्य स्नान के बाद सभी ने ऋषि तर्पण किया। अहिल्याबाई घाट पर विप्र समाज एवं श्रीशास्त्रार्थ महाविद्यालय की ओर से शुक्लयजुर्वेद के माध्यांदिनी शाखा से जुड़े ब्राह्मणों की जुटान हुई। पं. विकास दीक्षित के आचार्यत्व में प्रात: हिमाद्री संकल्प के साथ पहले अपामार्ग, कुशा एवं दुर्वा और फिर पंचगव्य का पान कर उससे स्नान किया। इस उपाकर्म के तहत ज्ञात-अज्ञात पापों के शमन ...