श्रमिकों में असंतोष होना चिंताजनक
नई दिल्ली, अप्रैल 30 -- कहने को तो आज (1 मई) मजदूरों के सम्मान और उनके योगदान को याद करने का दिन है, किंतु राष्ट्र का विकास करने वाले मजदूरों की स्थिति आज भी बहुत अच्छी नहीं है। यह बहुत चिंता की बात है कि उनको अपनी मांगों, विशेषकर वेतन-वृद्धि के लिए आंदोलन करना पड़ता है और सब्र का बांध टूटने पर हिंसा का सहारा लेना पड़ता है। वे मजबूरीवश तोड़फोड़, चक्का-जाम, आगजनी या पुलिस से टकराव जैसी हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं। यह याद रखना चाहिए कि सब्र का बांध कोई एक-दो दिन में नहीं टूटता। यह लंबे समय तक बर्दाश्त करने के बाद ही टूटता है, जिसके लिए ठेकेदारों का शोषण, सुविधाओं की कमी, काम के घंटे अधिक होना, कम मजदूरी और बेलगाम बढ़ती महंगाई की मार प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं। 13 अप्रैल की ही बात है, नोएडा की घटना हमें यह सोचने पर विवश करती ...
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