श्रमण संस्कृति शिविर में सम्यक दर्शन के आठ अंगों का विवेचन
मेरठ, मई 26 -- श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर असौड़ा हाउस में चल रहे श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर के छठे दिन पंडित सर्वज्ञ शास्त्री ने 'रत्नकरण्ड श्रावकाचार' ग्रंथ के माध्यम से सम्यक दर्शन के आठ अंगों का सरल और प्रेरक विवेचन किया। उन्होंने बताया कि सम्यक दर्शन मोक्षमार्ग का प्रथम आधार है। इसके आठ अंग निःशंकित, निःकांक्षित, निर्विचिकित्सा, अमूढ़दृष्टि, उपगूहन, स्थितिकरण, वात्सल्य व प्रभावना जीवन को धर्ममार्ग पर स्थिर बनाते हैं। इन सिद्धांतों को अपनाने से श्रद्धा निर्मल होती है और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने इन्हें जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। मौके पर विनोद जैन, मनोज जैन, संजय जैन, शोभा, अनामिका, कुसुम, सारिका जैन मौजूद रहे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्व...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.