मेरठ, अप्रैल 25 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन प्रातः जाप्य अनुष्ठान किया गया। तदोपरान्त श्री शांतिनाथ भगवान का अभिषेक किया। शनिवार को शांतिधारा वीरेंद्र जैन सपरिवार द्वारा की गई। समस्त श्रद्धालुओं ने शांतिधारा के मंत्रो के साथ सहयोग किया। अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने आनंद, उत्साह और उमंग के साथ मांडले पर 512 अर्घं चढाए। विधान में मुनि भाव भूषण जी महाराज ने श्रावक श्राविकाओं को कल्याण का मार्ग प्रश्स्त करते हुए कहा कि संसारी प्राणी आज अपने दुखों के कारण इतना दुखी नही है जितना की पड़ोसी के सुख को देख करके दुखी है। यह भी पढ़ें- आचार्य सुदर्शन मुनि के समाधि दिवस पर सामूहिक जाप का आयोजन यह आत्मा तो निश्चय की अपेक्षा से शुद्ध है ज्ञायक स्वभावी टंकोत्कीर्ण शुद्ध स्वरूपी है। संसार में ...