गोंडा, अप्रैल 16 -- खरगूपुर,संवाददाता। कस्बे में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिवस में प्रवाचक राधेश्याम शास्त्री ने द्रौपदी की कथा सुनाते हुए कहा कि एक छोटे से व्यंग और आहत करने वाले कठोर वचनों ने महाभारत करा दिया। प्रवाचक ने कहा कि द्रौपदी के बराबर की स्‍त्री पूरे विश्‍व के इतिहास में दूसरी नहीं है। याद आती है सावित्री की याद आती है सुलोचना की और बहुत यादें है। फिर भी मैं कहता हूं, द्रौपदी की कोई बराबरी ही नहीं है। द्रौपदी अद्वितीय है। उसमें सीता की मिठास तो है ही, उनमें माता कैकेयी की वीरता भी है। शकुन्तला का शौर्य और सौंदर्य भी है। प्रवाचक ने कहा कि द्रौपदी का कठोर व्यंग्य दुर्योधन के मन में तीर की तरह चुभ गया था। उसने द्रौपदी को अपमानित करने का कुप्रयास किया गया। इसमें उसने कोई कोर-कसर न छोड़ी थी। उन्होंने कहा कि लेकिन कर्म के ब...