पाकुड़, जुलाई 29 -- प्रखंड मुख्यालय में बांसलोई नदी किनारे अवस्थित श्री श्री 1008 बूढ़ा बाबा महेश्वर नाथ शिवमंदिर आदिवासी और गैर आदिवासियों के बीच अटूट आस्था व श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। इस शिवमंदिर के प्रति दूर-दराज के लोगों की आस्था का मूल कारण है आपरुपी प्रकट स्वयं कामना शिवलिंग। श्रद्धालुओं का यह विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई कामना अवश्य पूरी होती है। यह भी पढ़ें- Sawan Kavad Yatra 2026: आखिर सुल्तानगंज से ही क्यों लाया जाता है बाबा बैद्यनाथ के लिए गंगाजल?महामाहात्म्य की कहानियाँ जनश्रुति के मुताबिक महेश्वर नामक साधारण चरवाहे द्वारा मवेशियों को चराते वक्त पहली बार इस शिवलिंग को देखा गया था। लगभग दो फीट ऊंचाई तथा करीब डेढ़ फीट गोल आकार के इस शिवलिंग पर पवित्र श्रावण माह के अवसर पर शिवभक्त पश्चिम बंगाल के जंगीपुर से गंगाजल ल...