मथुरा, अप्रैल 5 -- राधारानी की ननिहाल मुखराई की माटी में श्यामा श्याम मिलन महोत्सव के पंचम दिवस रविवार को व्यासपीठ से संत प्रेमधन लालन महाराज ने गोकुल में नंदालय और गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा कि अपने आराध्य से एकाकार होना ही ब्रज की उपासना रीति है। हमारे एक एक भाव, चेष्टा और समर्पण आनंदस्वरुप श्रीकृष्ण के लिए होनी चाहिए, तभी हमें उनका प्रेम प्राप्त हो सकता है। गोलोकवासी महंत गर्वीली शरण महाराज के 21वें महोत्सव के रूप में आयोजित श्यामा श्याम मिलनोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण की गोकुल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि वसुदेव के कुलगुरु महर्षि गर्गाचार्य जी ने गोशाला में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का नामकरण किया। संत लालन ने कहा कि प्रेम इस सृष्टि का सर्वाधिक मूल्यवान ओर दुर्लभ तत्व है। यह शांति और सौहार्द ही नहीं बल्कि ईश्वर की भक्ति भी प्रदा...
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