शोबाजी से किसी का भला नहीं होता
नई दिल्ली, जून 7 -- बइंडियन प्रीमियर लीग, यानी आईपीएल समाप्त हो गया। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने फिर ट्रॉफी जीत ली। विराट की खूब बल्ले-बल्ले हुई। किंतु यह प्रतियोगिता मेरे लिए दो सवाल छोड़ गई। वैसे तो क्रिकेट अब वह खेल नहीं रहा, जब खिलाड़ियों को टिकट व होटल के पैसों का बंदोस्त खुद करना होता था। अब यहां पैसा बरसता है और वह भी छप्पर फाड़। जब तक देश के युवाओं के अंदर क्रिकेट के लिए ऐसा ही पागलपन बना रहेगा, तब तक पैसा ऐसे ही बरसता रहेगा। खैर, जो दो बातें मुझे खटकीं, उनमें से एक है- शिव की थीम पर आधारित कैलाश खेर का कार्यक्रम। सुनने में ऐसा लगता है कि चलो भाई, इतने बड़े और एलीट क्लास के खेल में भी भारतीयता और धार्मिकता के दर्शन हुए, पर जिन्होंने देखा होगा, उन्होंने देखा होगा कि कैसे अत्यंत न्यून वस्त्रों में लड़कियां नृत्य कर रही थीं और कुछ ऐसे...
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