गया, फरवरी 16 -- शेरघाटी के अनुमंडलीय अस्पताल में करीब दो साल पूर्व स्थापित ट्रॉमा सेंटर से दुर्घटना के पीड़ितों या जरूरतमंद मरीजों को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। ट्रामा सेंटर के नाम पर अस्पताल में सिर्फ एक साइन बोर्ड लगा है। स्थानीय लोगों की मानें तो हड्डियों की टूट फूट के बाद उसके प्लास्टर-ऑपरेशन या फिर कटने-जलने के मामले में कोई इलाज तो दूर हकीकत यह है कि मरहम पट्टी के आगे इस ट्रामा सेंटर में कोई इंतजाम नहीं है। छोटे-मोटे ऑपरेशन तक की सुविधा नहीं है। हमजापुर में रहने वाले योगेंद्र कुमार का कहना है कि कीटनाशक निगल लेने के बाद जब एक महिला को कुछ सप्ताह पूर्व अस्पताल लाया गया तो उसके पेट से विषाक्त जल निकाले बगैर उसे तुरंत रेफर कर दिया गया। शेरघाटी के बढ़ी टोले में रहने वाले एक सेवानिवृत कर्मचारी शशि कुमार कहते हैं कि हड्डियों की टूट फूट या ...