रांची, अगस्त 1 -- रांची, विशेष संवाददाता। हाईकोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत ने होटल का किराया न चुकाने के मामले में दर्ज आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि किराया न देने के मामले में धोखाधड़ी का अपराध तभी बनता है, जब शुरुआत में ही धोखा देने का इरादा हो। बाद में इरादा बदलने से धोखाधड़ी नहीं मानी जा सकती। इस संबंध में मुंबई की रहने वाली डॉ नेहा शांडिल्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। प्रार्थी ने चुटिया थाना में दर्ज प्राथमिकी एवं निचली अदालत की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की थी। यह भी पढ़ें- समझौता तोड़ना जमानत रद्द करने का आधार नहीं : कोर्टक्या है मामला प्रार्थी की माता सुधा तिवारी ने रांची के होटल में फिल्म निर्माता होने का दावा करते हुए 30 अक्तूबर 2017 से 24 नवंबर 2017 तक कई कमरे बुक कि...