शामली, मार्च 1 -- शहर के की जैन धर्मशाला में चल रहे आध्यात्मिक शिविर के दूसरे दिन प्रतीक सागर मुनिराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के अनुसार मानव जीवन का परम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है और इसके लिए आचरण की शुद्धता, संयम तथा सम्यक दृष्टि अत्यंत आवश्यक है। मुनिराज ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में भी स्त्री या पुरुष को निराश होने की आवश्यकता नहीं है। यदि साधक शुद्ध भाव से साधना करे तो आध्यात्मिक उन्नति संभव है। ऐसे समय में पंच नमोकार मंत्र का शांत चित्त से ध्यान करना चाहिए। उन्होंने बताया कि मंत्र जपते समय उसकी गिनती करने के बजाय अनंत भाव से स्मरण करना अधिक फलदायी माना गया है। साथ ही मौन एवं निराजन व्रत का पालन कर मन, वचन और शरीर की पवित्रता बनाए रखने का सं...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.