गोंडा, मई 25 -- तरबगंज, संवाददाता। श्रीबटुक भैरव मंदिर श्रीस्वामी नाथ आश्रम पूरे गयन पकड़ी में चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन रविवार देर शाम को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। कथा में श्रद्धा और विश्वास के मिलन का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कथा व्यास प्रज्ञान शुक्ला 'प्रसून' ने कहा कि जब महादेव दूल्हा बने तो उनका श्रृंगार अद्भुत था जिससे दुनिया को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। महादेव ने हल्दी न लगवाकर भस्म का लेप कराया क्योंकि हल्दी काम वर्धक है और भस्म काम नाशक है। उन्होंने सर्प का आभूषण धारण किया जिसका भाव है कि व्यक्ति को आभूषण में आसक्त नहीं होना चाहिए। यह भी पढ़ें- पार्वती जन्म प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु माथे पर चंद्रमा शीतलता का प्रतीक है। जटा में गंगा स्वच्छता का प्रतीक है। हाथ ...