वाराणसी, अगस्त 31 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। चातुर्मास व्रत के अनुष्ठान के क्रम में अस्सी स्थित पूर्वाम्नाय श्रीदक्षिणामूर्ति मठ में रविवार को श्रीशिव महापुराण एवं नासदीय सूक्तम् का पाठ हुआ। पाठ के बाद दंडी स्वामी वन वैभवारण्य सरस्वती ने पाठ किए गए अंश की विवेचना की। उन्होंने कहा कि गृहस्थों को अग्नि यज्ञ के रूप में प्रातः एवं सायं काल अग्नि में चावल आदि द्रव्यों की आहुति देनी चाहिए। ब्रह्मचारियों को समिधा से ही हवन करना चाहिए। संन्यासियों के लिए हवन तथा अग्नि यज्ञ यही है कि वे विहित समय पर हितकर, परिमित और पवित्र अन्न का भोजन कर लें। उन्हें अलग से अग्नि यज्ञ करने की आवश्यकता नहीं होती। यह भी पढ़ें- कर्मों का हिसाब यहीं तय होता है, भगवान का नाम दिलाता है मुक्ति : जीयर स्वामी नासदीयसुक्तम् की व्याख्या करते हुए उन्होंने प्राकृतिक, नैमित्त...