फतेहपुर, अप्रैल 12 -- फतेहपुर। जहां ज्ञान की गंगा बहनी थी, वहां व्यापार का जाल बिछा दिया, गरीब की पहुंच से शिक्षा को, कोसों दूर भगा दिया...आज के दौर में विद्या के मंदिर कहे जाने वाले स्कूल तेजी से मुनाफे की दुकानों में तब्दील हो रहे हैं। एक तरफ जहां शासन हर बच्चे को शिक्षित करने के लिए करोड़ों की योजनाएं चला रहा है, वहीं दूसरी ओर निजी स्कूल संचालकों की मनमानी ने शिक्षा को एक फलते-फूलते कारोबार का रूप दे दिया है। आलम यह है कि पंजीयन और खेल मैदान जैसे 35 कड़े मानकों को ताक पर रखकर गली-मोहल्लों में धड़ल्ले से स्कूल खोले जा रहे हैं, जिन्हें विभागीय सांठगांठ से मान्यता भी मिल जाती है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षकों और मुफ्त सुविधाओं (भोजन, ड्रेस, जूते-मोजे) के बावजूद छात्र संख्या सिमट रही है, जबकि बुनियादी सुविधा...