फतेहपुर, अप्रैल 6 -- फतेहपुर। निजी स्कूलों में एक अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र का आगाज हो चुका है, लेकिन इसके साथ ही अभिभावकों पर आर्थिक बोझ का पहाड़ भी टूट पड़ा है। नया सत्र, नया सिलेबस के नाम पर निजी प्रकाशकों और स्कूल संचालकों का एक ऐसा गठजोड़ सामने आ रहा है, जहां केवल किताबों के कवर बदलकर दाम दोगुने तक वसूले जा रहे हैं। कमीशन का खेल: वही कहानियां, बस दाम नएहैरानी की बात यह है कि बाजार में मिल रही नई किताबों का केवल बाहरी आवरण (कवर) ही नया है, जबकि अंदर का अधिकांश कंटेंट पुरानी किताबों जैसा ही है। विशेषकर पर्यावरण अध्ययन जैसी किताबों में कहानियां और अभ्यास प्रश्न ज्यों के त्यों हैं। प्रकाशकों ने चालाकी दिखाते हुए कुछ अध्यायों को आगे-पीछे कर दिया है ताकि उसे नया एडिशन बताया जा सके। यह सारा खेल स्कूल संचालकों और प्रकाशकों के बीच भारी-भरकम ...
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