देहरादून, अगस्त 9 -- विकासनगर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षण में नाटक के महत्व की जानकारी दी गई। प्रशिक्षु शिक्षकों को बताया गया कि नाटक के माध्यम से बच्चों को विषयवस्तु को सरल, सहज और रोचक तरीके से समझाया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों की सीखने में रुचि बढ़ने के साथ ही उनकी रचनात्मकता और अभिव्यक्ति क्षमता का भी विकास होता है। विभागाध्यक्ष टीना मोहन ने बताया कि कक्षा में पढ़ाते समय शिक्षक की शारीरिक भाव-भंगिमा, हाव-भाव, आवाज और भावनाएं पाठ्यक्रम और विषयवस्तु के अनुरूप होनी चाहिए। शिक्षक यदि विषय के अनुसार अपने हाव-भाव और प्रस्तुतीकरण में बदलाव करता है तो कठिन से कठिन पाठ भी बच्चों के लिए सहज और रुचिकर बन जाता है।

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