रांची, मई 15 -- रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने चौथे चरण में अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकेतर कर्मचारियों के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमित एवं समाहित कर्मचारियों को 5वें, 6वें और 7वें वेतन आयोग का लाभ देने से राज्य सरकार इनकार नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्षों तक सेवा लेने के बाद नियुक्ति की वैधता पर सवाल उठाना न केवल अनुचित है, बल्कि समानता के संवैधानिक अधिकार का भी उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को सभी वेतन पुनरीक्षण लाभ और बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया。

राज्य सरकार के आदेश का रद्द होना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके माध्यम से याचिकाकर्ता के वेतन पुनरीक्षण के दावे को अस्वीकार किया गया था। अदालत ने सरका...