नई दिल्ली, मार्च 14 -- कभी-कभी शिकारी खुद शिकार बन जाते हैं। यह कहावत अमेरिका और इजरायल पर जस की तस लागू होती है। हर दूसरे दिन जंग जीतने का दावा करने वाले जनाब डोनाल्ड ट्रंप इन सवालों से कन्नी काट जाते हैं कि 'जीत' के बाद जंग क्यों जारी है? हालात गवाह हैं कि उनके पास न तो हमले का कोई वाजिब कारण था, न युद्ध से निकलने की कोई योजना। वह फंस गए हैं। पांच हजार साल पुरानी सभ्यताएं कुछ बमों से खत्म नहीं होतीं, यह ईरान ने साबित कर दिया है। आक्रमण के पहले ही दिन उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई अपने सर्वोच्च 44 साथियों के साथ मारे जाते हैं। इजरायल और अमेरिका को लगा कि अब इराक की तरह बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर बगावत कर देंगे। हुआ इसका उलटा। लाखों लोग तेहरान में शोक मनाने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं। इसके साथ ही इजरायल और खाड़ी के देशों पर ईर...
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