कानपुर, जुलाई 29 -- चिड़ियाघर में रहने वाले 10 केन टाइगर शिकार करना भूल गए हैं। लिहाजा, अब ये ताउम्र चिड़ियाघर में ही रहेंगे। ये सभी बाघ अलग-अलग समय में रेस्क्यू कर चिड़ियाघर लाए गए थे। चिड़ियाघर में सहज भोजन मिलने से ये आलसी हो गए। अब ये जंगल में शिकार को पकड़ने के काबिल नहीं रहे। कोरोना काल में इंसान घरों में सिमटा तो बाघ जंगल से बाहर निकले। पीलीभीत, खीरी और सीतापुर जिले में बाघ गन्ने के खेतों में पहुंच गए। गन्ने के खेतों में पैदा होने वाले बाघों को 'केन टाइगर' कहा गया। केन टाइगर बड़े हुए तो टेरेटरी के चक्कर में खेतों से होते हुए दूर तक पहुंच गए। यही वजह है कि पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में केन टाइगरों का सामना इंसान से होने लगा। बीते कुछ वर्षों में एक के बाद एक बाघ को पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और सीतापुर से रेस्क्यू किया गया। पीलीभीत...