प्रयागराज, अक्टूबर 30 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में डीएम गाजियाबाद के हलफनामे और उसके साथ लगाई गई जांच रिपोर्ट पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि मामले में शिकायत को दबाने का स्पष्ट प्रयास दिखाई दे रहा है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजित कुमार एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बिजेंद्र कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। डीएम गाजियाबाद रवींद्र कुमार मांदड़ ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताया कि फरवरी 2026 में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने 17 फरवरी 2026 को डीएम को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। कोर्ट ने पाया कि हलफनामे के साथ संलग्न रिपोर्ट पर समिति के अन्य दो सदस्यों यानी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी गाजियाबाद और थानाध्यक्ष मुरादनगर के हस्ताक्षर नहीं थे। कोर्ट में उपस्थित डीएम ने कहा...