प्रयागराज, मार्च 8 -- विश्व महिला दिवस पर नए यमुना पुल के पास स्थित गायत्री त्रिवेणी प्रयाग पीठ में संगोष्ठी हुई। महिला अखाड़ा की प्रमुख त्रिकाल भवंता सरस्वती ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच हुए शास्त्रार्थ में न्यायाधीश के रूप में विदुषी उभय भारती ने निर्णय दिया था। लेकिन आज आदि गुरु शंकराचार्य के बताए मार्ग पर चलने वाले लोग महिलाओं को धर्म के क्षेत्र में आगे बढ़ता देख नहीं पा रहे। उन्होंने कहा कि आज का दिन महिलाओं के संघर्ष और उपलब्धियों को सम्मान देने का है। देश में महिलाओं को हमेशा शक्ति और संवेदना का प्रतीक माना गया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.