नई दिल्ली, मार्च 22 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने वैवाहिक जोड़े को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि विवाह पूर्ण नहीं हुआ हो और न ही पति-पत्नी के बीच कोई शारीरिक संबंध बनें और वे शादी के तुरंत बाद अलग हो गए हों, तो ऐसे में वैवाहिक संबंध को वास्तविक रूप से विकसित नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14 के तहत तलाक के लिए अनिवार्य 1 वर्ष की प्रतीक्षा अवधि को लागू करना जरूरी नहीं है। हाई कोर्ट ने यह फैसला फैमिली कोर्ट के एक वर्ष का इंतजार करने वाले फैसले को पलट दिया। जस्टिस विवेक चौधरी और रेणु भटनागर की बेंच ने कहा, "शारीरिक संबंध की पूर्ण अनुपस्थिति, साथ ही विवाह के तुरंत बाद अलगाव से स्पष्ट है कि वैवाहिक संबंध कभी सार्थक रूप से विकसित ही नहीं हुआ।" कोर्ट ने साफ कहा कि जब शादी सिर्फ कागजों में हो और असल जिंदगी में पति-प...