नई दिल्ली, जून 8 -- देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में कहा है कि अगर दो अविवाहित वयस्क आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाते हैं तो वह उन दोनों में से किसी के भी चरित्र पर काला धब्बा बताने का आधार नहीं हो सकता है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि उनके आपसी रिश्ते किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में गलत राय बनाने का कारण और आधार नहीं हो सकते हैं। जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने यह भी कहा कि हर रिश्ता शादी में नहीं बदलता और सिर्फ़ इसलिए कि कोई रिश्ता शादी में नहीं बदला, यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया है। पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को एक ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति का निर्देश देते हुए की, जिसका पुलिस कांस्टेबल पद पर चयन एक असफल प्रेम संबंध से जुड़े आपराधिक मामले में संलिप्तता के का...