नई दिल्ली, नवम्बर 4 -- मद्रास हाई कोर्ट ने देश में विवाह को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि भारतीय विवाह व्यवस्था को पुरुष प्रधानता की छाया से निकलना होगा। इसे समानता और आपसी सम्मान की रोशनी में विकसित होना चाहिए। जज एल विक्टोरिया गौरी ने कहा कि खराब विवाहों में महिलाओं का सहन करना गलत है। यह पीढ़ियों से पुरुषों को महिलाओं को नियंत्रित और दबाने के लिए प्रोत्साहित करता रहा है। न्यायाधीश ने यह टिप्पणी 1965 में विवाह करने वाले बुजुर्ग दंपति के वैवाहिक विवाद से संबंधित फैसले में की। यह भी पढ़ें- विवादों में 'ताज स्टोरी', वकील ने परेश रावल को भेजा नोटिस- मेरी बुक से कॉपी किया अदालत की ओर से कहा गया, 'इस मामले में पीड़िता उस पीढ़ी की भारतीय महिलाओं का प्रतीक है जिन्होंने लगातार मानसिक और भावनात्मक क्रूरता को सहन किया। यह आशा करते हुए कि...
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