रांची, नवम्बर 5 -- कोर्ट ने माना कि पति पत्नी के खिलाफ न तो क्रूरता के आरोप साबित कर सका और न ही ऐसी मानसिक बीमारी का प्रमाण दे पाया, जो हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का आधार बन सके। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने पति की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। पत्नी ने मानसिक बीमारी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि दहेज में पांच लाख रुपये की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया गया।क्या बोला कोर्ट बच्चे की कस्टडी तय करते समय माता-पिता की इच्छा या आर्थिक स्थिति से ज्यादा उसकी भलाई और भविष्य को महत्व दिया जाना चाहिए। केवल पिता के आर्थिक रूप से सक्षम होने या प्राकृतिक अभिभावक होने के आधार पर बच्चे की कस्टडी उन्हें नहीं दी जा सकती। बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए माता-पिता दोनों का प्यार,...