शादी के 7 फेरे क्या होते हैं? जानिए हर फेरे का अर्थ, वचन और उनकी खास अहमियत
नई दिल्ली, मई 3 -- भारतीय संस्कृति में शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो आत्माओं का पवित्र बंधन माना जाता है। हिंदू विवाह में लिए जाने वाले सात फेरे इस नए रिश्ते की सबसे अहम रस्म होते हैं, जिनमें हर फेरा एक खास वचन और जिम्मेदारी का प्रतीक होता है। ये सात वचन पति-पत्नी को जीवनभर एक-दूसरे के प्रति प्रेम, विश्वास, सम्मान और सहयोग बनाए रखने का संकल्प दिलाते हैं। अग्नि को साक्षी मानकर लिए गए ये फेरे न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि एक मजबूत और सफल वैवाहिक जीवन की नींव भी रखते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि शादी के 7 फेरे क्या होते हैं, हर फेरे का क्या अर्थ है और इनका जीवन में क्या महत्व होता है।क्या होते हैं शादी के 7 वचन-पहला फेरा तीर्थव्रतोद्योपन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्याय वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्...
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