नई दिल्ली, मई 28 -- ट्विशा शर्मा हो या दीपिका नागर केस इन मामलों ने शादी के बाद लड़कियों की जिंदगी और ससुराल में उनकी सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शादी के बाद बेटियां इतनी पराई हो जाती हैं कि माता-पिता उनके दर्द और तकलीफ को समय रहते समझ नहीं पाते? कई मामलों में देखा गया है कि लड़कियां अपनी परेशानी सीधे तौर पर नहीं, बल्कि इशारों में कहती हैं। उनकी बातों, व्यवहार और बार-बार कही जा रही छोटी-छोटी बातों से साफ संकेत मिलते हैं कि वे मानसिक तनाव या किसी दबाव में रह रही हैं। ऐसे समय में माता-पिता का सपोर्ट बेटियों के लिए सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। अगर शादी के बाद बेटी अपनी परेशानी शेयर कर रही है, तो उसे यह भरोसा दिलाए कि वह अकेली नहीं है। उसे डरने या चुप रहने की सलाह देने के बजाय यह कहना ज्यादा जरूरी है, ...