प्रयागराज, मई 27 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल विवाह का वादा कर लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को हर मामले में दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि शुरू से ही धोखा देने की मंशा साबित न हो तो बाद में विवाह से इनकार करना झूठे विवाह वादे पर दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आएगा। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने यह फैसला कपिल सोम और एक अन्य की ओर से दाखिल आपराधिक अपील पर सुनाया। कोर्ट ने मुरादाबाद की विशेष एससी/एसटी अदालत द्वारा पारित संज्ञान और समन आदेश को रद्द करते हुए पूरे मुकदमे की कार्यवाही ही निरस्त कर दी। मामले में महिला ने आरोप लगाया था कि इंस्टाग्राम पर संपर्क के बाद आरोपी कपिल सोम ने विवाह का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी और उसके परिवार ने उससे मारपीट, जातिस...