रांची, जुलाई 16 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल शादी का प्रस्ताव देना और कुछ समय के लिए किसी लड़की का हाथ बिना किसी अश्लील या गलत मंशा के पकड़ लेना लज्जा भंग करने का अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि आईपीसी की धारा 354 लागू करने के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना आवश्यक है कि आरोपी की मंशा महिला की लज्जा भंग करने की थी। जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने सरायकेला-खरसावां के चांडिल थाना से जुड़े मामले में आरोपी बुधु मुर्मू उर्फ गुडु मुर्मू की अपील स्वीकार करते हुए विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा 22 अगस्त 2023 को सुनाए गए दोषसिद्धि के फैसले और 28 अगस्त 2023 के सजा आदेश को रद्द कर दिया।

घटना का विवरण मामले के अनुसार, 21 जून 2017 को 10 वर्षीय छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी। आरोप था कि रास्ते...