हेमलता कौशिक, मई 2 -- दिल्ली ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि कोई भी शख्स केवल लिव-इन रिलेशनशिप का हवाला देकर शादी के झूठे वादे के आरोप से बच नहीं सकता। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी वैवाहिक स्थिति या अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर किसी महिला की सहमति प्राप्त की है, तो वह सहमति कानूनन वैध नहीं मानी जाएगी। इस मामले में आरोपी पहले से एक महिला के साथ रह रहा था और उसके दो बच्चे भी थे। इसे उसने पीड़िता से छिपाया। अदालत ने जोर देकर कहा कि लिव-इन संबंधों में भी भरोसा और ईमानदारी अनिवार्य है। तथ्यों को छिपाकर शारीरिक संबंध बनाना धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई आरोपी यह कहकर खुद को बचा नहीं सक...
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