अररिया, मार्च 8 -- जोगबनी, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि पांच मार्च का दिन नेपाल के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हो गया। जेन जी आंदोलन के बाद चुनाव से पहले पूरे देश में एक तरह की आशंका और अनिश्चितता का माहौल था। लोगों के मन में यह सवाल बार-बार उठ रहा था कि आखिर यह चुनाव होगा भी या नहीं। अंतरिम सरकार की प्रधानमंत्री अपने वादे पर खड़ी उतर पाएंगी या नहीं, इसे लेकर भी संदेह था। इसी बीच तरह-तरह की अफवाहें और भ्रम भी फैलाए गए। कई राजनीतिक मंचों से यहां तक कहा गया कि किसी भी हालत में यह चुनाव संभव नहीं है। कुछ मंत्रियों ने अपने भाषणों में चुनौती भरे अंदाज में यह सवाल भी उठाया कि जब चुनाव का माहौल ही नहीं बना है तो मार्च में मतदान कैसे होगा ? कई बड़े राजनीतिक दल तो इस माहौल में चुनाव कराने को असंभव बता दिया था। असंभव...
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