मेरठ, फरवरी 28 -- हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत रचना के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 20वें दिन शुक्रवार को सर्वप्रथम मंत्रोच्चारण पूर्वक भगवान आदिनाथ का अभिषेक तथा शांतिधारा की गई। शुक्रवार को 93 परिवारों ने विधान में भाग लेकर पुण्य अर्जन किया। मुनि भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि मन की शांति सबसे बड़ी संपदा और अशांति सबसे कड़ी दरिद्रता है। मनुष्य के जीवन में शांति है तो उसका जीवन स्वर्ग समान है। जीवन में अगर शांति है तो अभाव में भी आनंद होता है। दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जिसे शांति नहीं चाहिए। लोग मन की शांति के लिए ही मंदिर, तीर्थ, गंगा स्नान, दान, पूजा पाठ आदि करते हैं। स्वर्ण कलश से भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा संयम जैन ने की। आरती का दीप तरूणा जैन ने प्रज्ज्वलित किया। सायंकाल में भगवान आदिनाथ की आरती ...