मुजफ्फरपुर, मार्च 11 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान टीम। शहीद जुब्बा सहनी का गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से दूर है। शहीद के भाई के परिवार के लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। एक कट्ठा जमीन के सहारे इनके भाई का परपोता गया सहनी अपना जीवन यापन कर रहा है। शहीद जुब्बा सहनी के नाम पर बने स्मारक भवन तक पहुंचने का रास्ता आजतक नहीं बन पाया। मीनापुर प्रखंड के चैनपुर गांव को आदर्श गांव बनाने की घोषणा भी वर्षां से कागजों पर ही है।शहीद के गांव के लिए तमाम वादे और घोषणा करने वाले जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन आजतक नहीं जाग पाया है। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जुब्बा सहनी ने 16 अगस्त 1942 को मीनापुर थाने के अंग्रेज इंचार्ज लियो वॉलर को आग में जिंदा झोंक दिया था। बाद में पकड़े जाने पर उन्हें 11 मार्च 1944 को भागलपुर जेल में फांसी दे दी गयी थी।शहीद जुब्बा सहनी के पै...
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