गुड़गांव, अप्रैल 30 -- गुरुग्राम, कृष्ण कुमार। गगनचुंबी इमारतों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और स्मार्ट सिटी के तमगे से सजे साइबर सिटी गुरुग्राम की जमीनी हकीकत इसके चमकते स्वरूप से बिल्कुल उलट है। बुनियादी नागरिक सुविधाओं के मामले में यह शहर आज भी गंभीर रूप से संघर्ष कर रहा है। आलम यह है कि शहर में बढ़ती आबादी और प्रतिदिन आने-जाने वाले लाखों लोगों की मांग के बावजूद सार्वजनिक शौचालयों का घोर अभाव है। नगर निगम गुरुग्राम की उदासीनता का स्तर यह है कि पिछले 10 सालों में शहर की जरूरतों के हिसाब से एक भी नया सार्वजनिक शौचालय नहीं बनाया गया है। नतीजतन, शहर के 40 से 50 से अधिक प्रमुख और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर राहगीरों, दुकानदारों और विशेषकर महिलाओं को खुले में शौच करने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह भी पढ़ें- सफाई निरीक्षकों को प्रशिक्षण दियानगर निगम की...