लखीसराय, अप्रैल 24 -- लखीसराय, हिन्दुस्तान संवाददाता। अप्रैल माह की तपिश ने अभी से ही जून जैसा अहसास कराना शुरू कर दिया है। लखीसराय जिले में पारा 42 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है। इंसान तो अपनी प्यास बुझाने के लिए चापाकल, फ्रिज और वाटर कूलर का सहारा ले लेते हैं, लेकिन उन बेजुबानों का क्या जिनका पूरा जीवन प्रकृति के जलस्रोतों पर निर्भर है जिले के किऊल नदी, गुहिया पोखर, तालाब और कुएं या तो सूख चुके हैं या अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। स्थिति यह है कि तपती दोपहर में लावारिश मवेशी और पक्षी पानी की एक बूंद के लिए मीलों भटकने को मजबूर हैं। यह भी पढ़ें- पशुओं को छायादार एवं हवादार स्थान पर रखें और चार बार पिलाएं साफ पानी यह केवल एक प्राकृतिक संकट नहीं बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का भी जीता जागता प्रमाण है।------पानी की तलाश में पशु कर रह...
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