आगरा, मई 8 -- शहर की बड़ी आबादी 'आधी नींद' के साथ जिंदगी गुजार रही है। देररात तक मोबाइल और लैपटॉप की स्क्रीन पर समय बिताने की आदत, बढ़ता मानसिक तनाव और अनियमित दिनचर्या ने लोगों की नींद छीन ली है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में करीब 20 प्रतिशत लोग अनिद्रा (इंसोम्निया) से जूझ रहे हैं, जबकि लगभग 30 प्रतिशत लोग जरूरत से काफी कम नींद ले पा रहे हैं। इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य पर तो पड़ ही रहा है, मानसिक संतुलन और कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। बदलती जीवनशैली अब लोगों की नींद पर भारी पड़ने लगी है। पहले जहां लोग रात 9-10 बजे तक सो जाते थे, वहीं अब देर रात तक मोबाइल, टीवी और सोशल नेटवर्किंग पर समय बिताना आम हो गया है। इससे शरीर की जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) गड़बड़ाने के साथ नींद का चक्र बिगड़ रहा है। शहर के प्रमुख निजी मनोचिकित्सक और जिल...
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