गिरडीह, मार्च 11 -- सियाटांड़, प्रतिनिधि। नवडीहा ओपी क्षेत्र के शहरपुरा में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हो गया। इस अवसर पर कथा वाचक आचार्य कन्हैयालाल शास्त्री ने भक्तवत्सल भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा चरित्र का वर्णन किया। बोले भाग्य के लिखे को परमात्मा भी नहीं मिटा सकते हैं, कर्म का फल भोगना ही पड़ता है। इसलिए मनुष्यों को चाहिए कि सदा शत् कर्म करते रहे और भाग्य की चिंता न करें। समय आने पर ईश्वर स्वयं भक्तों को बचाने को तत्पर रहते हैं। कहा कि भगवान कृष्ण और उनके निर्धन सखा सुदामा की नि:स्वार्थ मित्रता, अटूट भक्ति और त्याग की पावन कथा है। गरीबी में भी संतोषी सुदामा पत्नी के आग्रह पर द्वारकाधीश कृष्ण से मिलने जाते हैं, जहां कृष्ण उन्हें गले लगाकर, आंसुओं से चरण धोकर आदर देते हैं और बिन मांगे ही सुदामा की गरीब...
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