फतेहपुर, अप्रैल 9 -- फतेहपुर। सहालग की दस्तक के साथ ही बाजारों में रौनक तो लौट आई है, लेकिन महंगाई की तपिश ने खुशियों के रंग को थोड़ा फीका कर दिया है। खाड़ी देशों के तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे तौर पर बेटियों के दान-दहेज के सामान पर दिख रहा है। लकड़ी के फर्नीचर से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक के दाम बढ़ने से जहां व्यापारियों के चेहरे खिले हैं, वहीं एक पिता को अपनी बिटिया की विदाई के लिए अपनी जेब पहले से कहीं ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध में फिलहाल विराम लग चुका है, लेकिन रोजमर्रा के सामान में होने वाली महंगाई पर विराम नहीं लग पा रहा है। क्रूड आयल के महंगा होने के कारण पहले ही प्लास्टिक के दामों के साथ ही अन्य वस्तुओं पर महंगाई की मार पड़ रही है। लेकिन, सहालग से ठीक पहले लकड़ी के विभिन्न सामान...
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