बस्ती, मई 1 -- बस्ती, निज संवाददाता। शरीर रूपी रथ को जो भक्त श्रीकृष्ण के हाथों में सौंप देता है, उसे विजय मिलती है। सुदामा ने ईश्वर से निरपेक्ष प्रेम किया तो उन्होंने सुदामा को अपना लिया। उन्हें अपने जैसा वैभवशाली भी बना दिया। मनुष्य का शरीर ही वह कुरूक्षेत्र है, जहां निवृत्ति और प्रवृत्ति का युद्ध होता रहता है। जीव जब ईश्वर से प्रेम करता है तो ईश्वर जीव को भी ईश्वर बना देते हैं। यह बातें कथा व्यास विद्याधर भारद्वाज ने सिविल लाइन्स में विनोद प्रकाश शुक्ल के आवास पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कही। भगवान कृष्ण की महिमा का गान करते हुये कथा व्यास ने कहा कि यदि पति धन, सम्पत्ति, सुख सुविधा दे और पत्नी ऐसे पति की सेवा करे तो इसके आश्चर्य क्या है। यह भी पढ़ें- श्रीमद् भागवत में जुट रही श्रद्धालुओं की भीड़ धन्य हैं सुदामा की पत्नी सुशीला, जिन्...
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