मोतिहारी, मार्च 31 -- सुगौली, निज संवाददाता। झूठ, समय और परिस्थिति के अनुसार बदलता रहता है। पर सत्य हमेशा अडिग रहता है। वैसे आपका नाम भी सच नहीं है। एक बच्चा अपने बचपन में अपने खिलौने को संभाल कर उसका जतन करता है। पर वहीं बचपन के बाद फिर किशोरावस्था में उस खिलौने का उपयोग नहीं रह जाता। फिर जवानी और बुढ़ापे में शरीर तो बदलता गया। पर आपका नाम वहीं रह गया। उक्त बातें प्रखंड के भटहा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को संबोधित करते हुए राजनंदनी किशोरी ने कही। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के बाद दो रास्ते निकलते हैं। संसार या फिर सन्यास। परिवार में भी एक समय ऐसा आता है जब आप सन्यास की तरफ आकृष्ट होने लगते हैं। उन्होंने कहा कि हम जहां परिवार में हर सुख शांति का भंडार इकट्ठा कर दुखी होते है, तो वहीं पहाड़ों पर गुफाओं में रहकर भी साधु आनंद में...