फतेहपुर, फरवरी 25 -- फतेहपुर। कागजों में जिले में 228 जन आरोग्य मंदिर संचालित हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। कहीं महीनों से ताला लटका है, तो कहीं परिसर शराबियों का अड्डा बन चुका है। कई केंद्रों पर न बिजली है, न डॉक्टर, न दवाएं। कहीं बिना कनेक्शन चोरी से बिजली जलाकर काम चलाया जा रहा है तो कहीं सोलर पैनल के नाम पर सिर्फ औपचारिकता है। ग्रामीण इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग आंकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त दिखता है। सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत गांवों को है, तब ये जन आरोग्य मंदिर आखिर किसके लिए संचालित हो रहे हैं? क्या यह सिर्फ फाइलों में चल रही व्यवस्था है, या फिर जिम्मेदारों की लापरवाही का नतीजा, पेश है एक रिपोर्ट... गोपालगंज पीएचसी के अंतर्गत आने वाले मौहार स्थित जन आरोग्य ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.