नई दिल्ली, अक्टूबर 5 -- इस साल शरद पूर्णिमा का पर्व 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान होती हैं। यही कारण है कि इसे धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर बंगाली समाज में इस दिन लखी पूजा का आयोजन भक्तिभाव के साथ किया जाता है। शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। 'कोजागरी' का अर्थ है 'कौन जाग रहा है'। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जागरण कर पूजा कर रहा है। जो भक्त जागरण कर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, उनके घर में देवी प्रवेश करती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी की उत्पत्ति शरद पूर्णिमा की तिथि पर हुई थी। इसलिए इसे देवी लक्ष्मी के प्राकट्य उत्सव के रूप में...
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