गंगापार, मार्च 12 -- रमजान के तीसरे अशरे की शुरुआत होते ही रोजेदार शब-ए-कद्र की तलाश में खास इबादतों में जुट गए हैं। इसे इस्लाम में बेहद बरकत और रहमत वाली रात माना जाता है। सूफी खाने नक्शबंदी ने बताया कि इस रात की इबादत को इंसान की तकदीर संवारने का बेहतरीन मौका बताया गया। रमजान के पहले और दूसरे अशरे के बाद जैसे ही तीसरा अशरा शुरू होते ही, मुसलमान शब-ए-कद्र की तलाश में इबादत, कुरान की तिलावत, तौबा और दुआओं में मशगूल हो जाते हैं। शब-ए-कद्र रमजान की सबसे अहम और मुकद्दस रात है, जिसे तकदीर की रात भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि लोग 27वीं रमजान की रात को शब-ए-कद्र मानते हैं, लेकिन हदीसों में इसे रमजान की ताक रातों-21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं-में तलाश करने का हुक्म दिया गया है। इन रातों में इबादत करने से अल्लाह की खास रहमत और मगफिरत नस...