नवादा, फरवरी 5 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। गुनाहों की माफी की रात शब-ए-बरात दुआओं के साथ कटी। मस्जिदों में विशेष नमाज पढ़ी गयी। इबादत व मगफिरत के इस पर्व पर परम्पराओं को निभाने की पुरजोर कोशिश में मुस्लिम धर्मावालम्बी रहे। दिखावा व हुल्लड़बाजी से दूर रह कर शब-ए-बरात मनाने पर सभी का विशेष जोर रहा। इस क्रम में रात भर इबादत करने के महत्व को समझते हुए तमाम लोगों ने शब-ए-बरात की रात अतीत में किए गए कार्यों को ध्यान में रखते हुए आने वाले वर्ष के लिए अल्लाह से भाग्य लिखने की मिन्नत की। रात-रात भर जागकर इबादत करते हुए सभी ने दुआएं मांगी और फातिहा पढ़ी। वहीं, मुसलमान औरतों ने इस रात घर पर रह कर ही नमाज पढ़ा तथा कुरान की तिलावत करके अल्लाह से दुआएं मांगी। पंद्रहवीं शाबान की रात में अल्लाह अपने बंदों की मगफिरत यानी गुनाहों की माफी फरमाते हैं इस...