नई दिल्ली, अप्रैल 15 -- उपभोक्ता आयोग ने एक अहम फैसले में कहा कि बीमा कंपनियां क्लेम देने के लिए शब्दों के जाल बुनकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं। आयोग ने पीड़िता के पक्ष में फैसला देते हुए उसे न्याय दिलाया। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह पॉलिसी के तहत देय राशि का भुगतान ब्याज सहित करे और मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा भी दे। दरअसल, पति की मौत के बाद जिस बीमा पॉलिसी से राहत की उम्मीद थी, उसी ने ऐन वक्त पर साथ छोड़ दिया। ऐसे में विधवा उपभोक्ता को न केवल अपनों को खोने का गम सहना पड़ा, बल्कि वह कर्ज और बीमा कंपनी की बेरुखी के बीच कानूनी लड़ाई में भी उलझ गई। बीमा कंपनी ने मौत की वजह को तकनीकी जाल में उलझाकर क्लेम खारिज कर दिया, लेकिन आखिरकार अस्पताल की ओर से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र ने पूरा मामला पलटते हुए करीब छह साल बाद पीड़िता को न्याय...
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